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पशु प्रेमियों के लिए खुशखबरी- अब कुत्तों को भी मिला… मूल निवासी होने का अधिकार, अब उन्हें उनके मोहल्लों से भगाया नहीं जा सकता ।

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केंद्र ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की नई नियमावली को किया अधिसूचित-

पिछले दिनों कई स्थानों पर आवारा कुत्तों की बर्बरता के बाद इससे छुटकारा पाने की मांग तेज होने लगी है। लेकिन पशु प्रेमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि कोई कुत्ता चाहे कितना भी आवारा या कटास (काटने वाला) हो, उसे उसके मोहल्ले या गांव से विस्थापित नहीं किया जा सकता है। वह जहां चाहे रह सकता है या अपनी मर्जी से जा भी सकता है। किसी का जोर-जुल्म नहीं चलेगा।

क्या है सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश:

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार केंद्र सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत पशु (कुत्ता) जन्म नियंत्रण नियमावली को मंगलवार को अधिसूचित कर दिया है। जानवरों पर अत्याचार रोकने के लिए देश में पहली बार 1960 में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम लाया गया था। केंद्र सरकार ने इसी अधिनियम के तहत पशु (कुत्ता) जन्म नियंत्रण नियमावली-2023 को अधिसूचित किया है।

मनुष्यों एवं आवारा कुत्तों के बीच के संघर्षों से निपटने के उपाय:

कुत्तों को खिलाने या आश्रय देने से भी कोई मना नहीं कर सकता है, जहां ये कुत्ते निवास कर रहे हैं। किसी क्षेत्र से कुत्तों को भगाए-हटाए बिना भी मनुष्यों एवं आवारा कुत्तों के बीच के संघर्षों से निपटने के उपाय तलाशे जा सकते हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई आदेशों में विशेष रूप से उल्लेख किया है कि कुत्तों को विस्थापित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है और निगमों को पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) तथा रेबीज रोधी कार्यक्रम को संयुक्त रूप से चलाने की जरूरत है।

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